नमस्ते दोस्तों! क्या आप कभी खुद से इतनी नफरत महसूस करते हैं कि दिल की गहराइयों से निकलने वाली वो उदासी शब्दों में ढल जाती है? अगर हाँ, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आज हम बात कर रहे हैं khud se nafrat shayari की, जो उन पलों को बयां करती है जब हम खुद को दोषी ठहराते हैं, अपनी कमियों से जूझते हैं, और उस अंदरूनी संघर्ष को आवाज देते हैं।
Khud se Nafrat Shayari
खुद से ही अब नफ़रत सी हो गई,
हर खुशी मेरी ज़िंदगी से दूर हो गई।
आईना देखूं तो खुद से डर लगता है,
ये चेहरा अब मुझे औरों से दूर करता है।
अपनी ही गलियों में खो गया हूँ मैं,
ख़ुद की आवाज़ अब मुझे डराती है।
हर ख्वाब मेरे लिए दर्द बन गया,
ख़ुद से नफ़रत ही मेरी आदत बन गया।
दिल मेरा अब तन्हा और उदास है,
ख़ुद से ही नफ़रत अब मेरा पास है।
जो खुद को समझा था कभी अपना,
आज उसी से दूरी मेरी ज़रूरी बन गया।
अपने ही कदमों से डर लगता है,
हर राह में खुद से लड़ता हूँ मैं।
हँसी मेरे चेहरे पर कभी नहीं ठहरती,
ख़ुद से नफ़रत अब हर सांस में उतरती।
जो था कभी आईना, अब वो ताना बन गया,
ख़ुद की हर पहचान मुझसे खफा बन गया।
खुद की परछाईं से डर लगता है,
जैसे हर अक्स में मेरी सज़ा लिखी है।
अपने ही दिल से जंग चल रही है,
ख़ुद से नफ़रत मेरी सोच में पल रही है।
खुद को देखा, खुद को खोया,
इस नफ़रत में ही मैं अब रोया।
किसी और की तलाश अब नहीं रही,
ख़ुद से ही लड़ाई मेरी रोज़ की कहानी रही।
हर ख्वाब मेरे लिए दर्द बन गया,
ख़ुद से नफ़रत अब मेरी आदत बन गया।
अपनी ही परछाईं से डर लगता है,
जैसे हर अक्स में मेरा दर्द रह गया है।
दिल मेरा अब तन्हा और उदास है,
ख़ुद से ही नफ़रत अब मेरा पास है।
खुद की गलियों में अब खो गया,
ख़ुद की ही आवाज़ मुझे डराती है।
जो कभी अपना था, अब अजनबी बन गया,
ख़ुद से दूरी ही अब मेरी मजबूरी बन गया।
अपनी ही खामियों से घबराता हूँ,
ख़ुद से नफ़रत ही अब मेरा सहारा बनता हूँ।
खुद की तस्वीर अब डराती है,
हर अक्स में मेरी सज़ा सजाती है।
दिल मेरा अब तन्हा और उदास है,
ख़ुद से ही नफ़रत अब मेरा पास है।
खुद को खोया, खुद को भुलाया,
इस नफ़रत में ही खुद को पाया।
आईना देखूं तो खुद से डर लगता है,
जैसे हर अक्स में मेरी सज़ा रहती है।
अपने ही ख्यालों में अब फंसा हूँ,
ख़ुद से नफ़रत मेरी जिंदगी का हिस्सा हूँ।
जो कभी हँसता था, अब रोता है,
ख़ुद से नफ़रत ही उसका साथी बनता है।
अपनी ही गलियों में अब खो गया,
ख़ुद की आवाज़ मुझे डराती है।
जो खुद को समझा था कभी अपना,
आज उसी से दूरी मेरी ज़रूरी बन गया।
हर अक्स में मेरा दर्द लिखा है,
ख़ुद से नफ़रत अब मेरी तक़दीर बना है।
खुद की गलियों में अँधेरा सा है,
हर कदम पर खुद से लड़ाई का नज़ारा सा है।
जो कभी दोस्त था, वो अब दुश्मन बन गया,
ख़ुद से नफ़रत ही मेरी पहचान बन गया।
एक बार इन्हें भी पढ़ें
दोस्तों, आज हमने उन गहरे और दर्द भरे लफ्ज़ों को साथ में पढ़ा, जो कई बार हमारा अपना मन ही बोलता है। Khud se Nafrat Shayari सिर्फ़ शब्द नहीं होती – ये वो आईना है जो हमें हमारी सबसे कच्ची, सबसे सच्ची और सबसे नाज़ुक भावनाओं से रूबरू कराता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खुद से नफरत शायरी क्या है?
वो शायरी जो खुद को दोष देने, शर्मिंदगी और self-hate की भावनाओं को बयां करती है।
ऐसी शायरी पढ़ने से फायदा क्या है?
दर्द को validate करती है, अकेलापन कम करती है और राहत देती है।
क्या ये शायरी और डिप्रेशन बढ़ा सकती है?
सिर्फ दर्द वाली पढ़ने से हाँ, इसलिए self-love वाली भी साथ में पढ़ें।
ये शायरी आप कहाँ से लाते हो?
ज्यादातर टीम के शायर लिखते हैं या क्रेडिट के साथ विश्वसनीय सोर्स से लेते हैं।
खुद से नफरत कैसे कम करें?
रोज़ खुद से अच्छी बातें कहें, छोटी जीत नोट करें, और healing शायरी पढ़ें।
क्या self-love शायरी भी डालते हो?
हाँ, बहुत सारी – सर्च करें “self love shayari” या “खुद से प्यार शायरी”।
इन शायरियों को कहाँ इस्तेमाल कर सकता हूँ?
स्टेटस, कैप्शन, डायरी, दोस्त को भेजने या खुद को मोटिवेट करने में।
>> मराठी शायरी के शौक़ीन हैं ? तो Shayari Read आपके लिए अनुकूल जगह है, जहाँ सीधी बात न रखकर, सिर्फ अल्फ़ाज़ों को कहा जाए, ||निवेदन है एकबार जरूर देखें||
